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In 2020, the world will celebrate the sixth International Yoga Day on Sunday, 21 June 2020. In 2014, the Indian Prime Minister Narendra Modi proposed the idea of International Yoga Day during his speech delivered at the United Nations General Assembly.


Yoga is a way of life. Having its origins in ancient India, Yoga is all about the system that aims at the holistic wellness of humans including the body, mind and the spirit. The idea of International Yoga Day was conceived in order to spread the awareness about the invaluable benefits of Yoga among the world community for physical, mental and spiritual well-being. On this day, several countries organize Yoga camps and awareness programs with the enthusiastic participation of their citizens.

Bibliography - businessinsider.in

धनुरासन - पेट के बल लेटिये | इसके बाद दोनों टाँगों को घुटनों से मोड़ें और दाहिने टाँग की एड़ी को दाहिने नितम्ब पर और बायीं टाँग की एड़ी को बायें नितम्ब पर रख लीजिये | फिर दोनों हाथों को पीठ पर ले जाकर दाहिने हाथ से दाहिने पैर के अँगूठे को पंजे सहित पकड़ें | इसी प्रकार बायें हाथ से बायें अँगूठे को पंजे सहित पकड़ें | दोनों घुटने आपस में सटे रहने चाहिये | इस स्थिति में आने पर साँस खीचें और फिर साँस रोककर उसे धीरे-धीरे छोड़ें |



लाभ – 1. इससे रक्त का संचार उदर की तरफ काफी मात्रा में होने लागता है |

2. भूख खूब लगती है और पाचन बढ़ जाता है |

3. आमाशय और आँतों के दोष दूर हो जाते है |

4. मेरूदण्ड लचीला तथा सशक्त बनता है |

5. पेट की चर्बी घटती है |

6. भुजाओं तथा कन्धों में मजबूती आती है |


सिंहासन – इसमें दोनों घुटनों को झुकाकर जमीन पर टिका दीजिये |  इसके बाद दोनों हाथो को जाँघों के समीप रखें और जीभ को बाहर की ओर लम्बी निकाल लें |


लाभ – 1. इससे ह्रदय दृढ़ होता है |

2. वक्षस्थल में विस्तीर्णता आती है |

3. उदर का मोटापन दूर होता है |

4. वाणी में मधुरता और ओज तथा मुख पर निखार आता है |

5. नेत्र-ज्योति और पाचन-तीव्र होती है |


कोणासन – सीधे खड़े हों और फिर दोनों पैरों को जमीन पर जमा लें परन्तु दोनों पैरों के बीच का अन्तर एक मीटर से कम न रहे | इसके बाद बायें हाथ को झुकाकर उसकी हथेली को बाँयें पैर के घुटने से नीचे लगा लें और दाँयें हाथ को सामने की ओर फैला लें |


लाभ – 1. इससे शरीर में स्फूर्ति आती है |

2. चेहरे पर तेज आता है और मुंहासे कम होते हैं |

3. कूल्हों पर चर्बी नहीं चढ़ती है तथा आकार भी ठीक रहता है |

4. साइटिका के दर्द में लाभ होता है |

5. पीठ के दर्द में भी लाभप्रद है |

6. जिन नारियों को सीधा चलने में परेशानी होती है, उन्हें इस आसन से लाभ होता है |

7. गर्भावस्था के पहले 6 महीने तक इस आसन से लाभ होता है |

8 . मानसिक तनावों से मुक्ति मिलती है |

9. काम-वासना शान्त होती है |


गोमुखासन – जमीन पर बैठकर उलटी टाँग को अन्दर मोड़ें और एड़ी पर बैठ जायें | सीधी टाँग को उलटी टाँग पर मोड़कर ऐसे रखें कि पैर जमीन को छुएँ | अब सीधा बाजू उठाकर कन्धे के पीछे से कुहनी को मोड़ें | उलटे बाजू को पीठ के पीछे से कुहनी मोड़कर ऊपर उठायें जिससे दोनों बाजुओं की उंगलियाँ आपस में मिल जायें | पीठ को बिल्कुल सीधा और आँखे खुली रखें | साँस सामान्य गति से लें | यह आसन दोनों पाँव पर बारी-बारी से बैठकर पूरा माना जाता है इस आसन को केवल चार बार करें |

लाभ - 1. शरीर में स्फूर्ति आती है |

2. इस आसन से कमर, पैर तथा घुटनों को ताकत मिलती है |

3. दमा तथा फेफड़े की हर बीमारी के लिए लाभप्रद है |

4. शरीर के जोड़ों में लचीलापन आता है |

5. कन्धों व बाजुओं में लोच व ताकत आती है |

6. इसके अभ्यास से अंडवृद्धि नहीं होती है |

7. कमर की चर्बी कम होती है |

8. इससे वीर्य विकार भी दूर होते है |


पद्मासन - योग साहित्य में इस आसन को सभी योगियों ने बड़े महत्व का माना है । इसके कई भेद हैं - बद्ध-पद्मासन, उत्थित पद्मासन आदि । साधारण पद्मासन की क्रिया-विधि इस प्रकार है-
दोनों टाँगों को फैलाकर बैठ जाईये । दाहिने पैर को घुटने से मोड़कर बाँयी जाँघ पर रख दीजिये । दाहिने पैर की एड़ी बाँयी जाँघ के मूल से मिली रहेगी । पैर का तलुवा ऊपर की ओर रहना चाहिये । बाँये पैर को घुटनों से मोड़कर दाहिनी जाँघ के ऊपर रखिये । बाँये पैर की एड़ी दाहिनी जाँघ के मूल से सटाइए और पैर के तलवे को ऊपर की ओर रखिये । जंघाएँ और घुटने जमीन पर टिके रहने चाहिये । दोनों खुली हुई हथेलियाँ कमल की पंखुड़ियों के समान रखिये ।

लाभ-1. इस आसन से ब्रह्मचर्य के साधन में सहायता मिलती है  
2. इसमें वस्ति प्रदेश में रक्त प्रवाह उचित रूप से होता है ।
3. इससे स्वप्नदोष जैसे रोगों से मुक्ति मिल जाती है ।
4. यह भूख को बढ़ाता है ।
5. यह आत्मशक्ति को बढ़ाने में सहायक है ।
6. इससे वात का नाश होता है ।
7. यह रस, रक्त आदि शरीर की धातुओं की समुचित रूप से वृद्धि करने में सहायक है ।

पश्चिमोत्तासन - इसमें दोनों टाँगों को फैलाकर अच्छी तरह से तान लीजिये । दोनों हाथ जमीन पर बगल में रहने चाहिए । यह इस आसन की प्रथम अवस्था है । इसके बाद अँगूठा पकड़ने का प्रयास करें । परंतु ऐसा करते समय टाँग व घुटना ऊपर ना उठे और ना ही मुड़े । यह इस आसन की दूसरी स्थिति है । हाथ से अँगूठे को पकड़ लेने के बाद साँस को बाहर निकालिये और कमर से सिर तक के पूरे भाग टाँगों के ऊपर धीरे-धीरे झुकाइये । शरीर को यहाँ तक झुकाइये की घुटना सिर से छूने लगे और नाक और घुटना छू जायें । यह तीसरी अवस्था है । यह आसन कठिन अवश्य है । परंतु नियमित रूप से प्रयास करने से कमर में लोच आ जाएगी और पूर्ण आसान बन जायेगा ।

लाभ - 1. इसके नियमित अभ्यास से मेरुदण्ड में स्थित सुषुम्ना नाड़ी सतेज तथा निर्दोष हो जाती है ।
2. पाचन शक्ति तीव्र होती है ।
3. गहरी साँस के अभ्यास से फेफड़े मजबूत होते हैं ।
4. पेट को घटाने में बहुत लाभदायक है ।
5. इससे योगसिद्धि तथा मधुमेह की चिकित्सा में सहायता मिलती है ।
भुजंगासन - इसमें पहले जमीन पर पेट के बल लेटकर पाँव के अँगूठे से लेकर नाभि तक शरीर का भाग जमीन पर रहने दें । हथेलियों को भी जमीन पर टिकायें रखें और सिर को इस तरह ऊँचा उठायें जैसे सर्प फन को ऊँचा उठाये रखता है । इस आसन में पीठ की हड्डियाँ, पेड़ू तथा कमर तक का हिस्सा उठा रहता है । यही इस आसन की पूर्ण स्थिति है ।

भुजंगासन


लाभ - 1. यह आसन स्त्रियों के लिये महत्वपूर्ण  है । इससे प्रदर रोग तथा गर्भाशय की विकृति में लाभ होता है ।
2. यह आलस को दूर करने में सहायक है ।
शलभासन - इसमें जमीन पर पेट के बल लेट जाइये | हाथों को बगल में रखिये और हथेलियों को जमीन पर रखिये | पैरों के तलवों को ऊपर की और रखिये | इसके बाद हाथ और पेडू पर बल देकर दोनों टाँगों को जमीन से उठाकर तान लीजिये | ठुड्डी जमीन से स्पर्श करती रहनी चाहिए | साँस खींचकर रोकें और कुछ क्षण बाद छोड़ें | 




लाभ - 1. इससे छाती बड़ी होती है | 
2. कमर में लचक आती है |
3. कब्ज दूर होती है |
4. पेट के विकार दूर होते हैं |
5. पाचन-शक्ति बढ़ती है |
6. मानसिक तनाव दूर होता है |
7. यह आसन नारियों के लिए बहुत लाभदायक है |
8. यह पीठ तथा कमर के निचले भाग एवं नितम्बों की पेशियों की शक्ति को बढ़ाता है |
9. यह कमर-दर्द, घुटनों तथा जोड़ो के दर्द आदि को लाभ पहुँचाता है |

चक्रासन - इसमे टाँगों को नीचे की ओर करके घुटनों के बल बैठिये । इसके बाद दोनों हाथों की कुहनियों को जमीन पर जमाकर औंधे होकर प्रणाम करने जैसी मुद्रा बना लीजिये ।

लाभ - 1. इसके अभ्यास से उदर शूल, उदरवात तथा मलावरोध दूर करके स्वास्थ्य की वृद्धि होती है ।
2. स्फूर्ति प्रदान होती है ।
3. पेट साफ रहता है ।
4. कमर का दर्द दूर करता है ।
5. मधुमेह जैसी बीमारी में भी लाभप्रद है ।
6. इस आसन को स्त्री-पुरूष दोनों कर सकते है ।