भुजंगासन

भुजंगासन - इसमें पहले जमीन पर पेट के बल लेटकर पाँव के अँगूठे से लेकर नाभि तक शरीर का भाग जमीन पर रहने दें । हथेलियों को भी जमीन पर टिकायें रखें और सिर को इस तरह ऊँचा उठायें जैसे सर्प फन को ऊँचा उठाये रखता है । इस आसन में पीठ की हड्डियाँ, पेड़ू तथा कमर तक का हिस्सा उठा रहता है । यही इस आसन की पूर्ण स्थिति है ।

भुजंगासन


लाभ - 1. यह आसन स्त्रियों के लिये महत्वपूर्ण  है । इससे प्रदर रोग तथा गर्भाशय की विकृति में लाभ होता है ।
2. यह आलस को दूर करने में सहायक है ।

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